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न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है?

  • Writer: KD Maurya
    KD Maurya
  • Dec 19, 2025
  • 4 min read

MSP कैसे तय किया जाता है? | पूरी और प्रमाणिक जानकारी हिंदी में

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण कृषि मूल्य नीति है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों के लिए न्यूनतम सुरक्षित मूल्य उपलब्ध कराना है।जब बाजार में किसी फसल के दाम बहुत गिर जाते हैं, तब MSP किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने का काम करता है।

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MSP Kya hai?

इस लेख में आप जानेंगे:

  • MSP क्या होता है

  • MSP का फुल फॉर्म

  • MSP की शुरुआत कब हुई

  • MSP कैसे तय किया जाता है

  • MSP कौन तय करता है

  • MSP के फायदे और सीमाएं

  • किन फसलों के लिए MSP घोषित किया जाता है

MSP क्या है? (MSP Kya Hai)

MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) वह न्यूनतम कीमत होती है, जिस पर भारत सरकार कुछ अधिसूचित फसलों को खरीदने की व्यवस्था करती है।यदि बाजार में किसी फसल का भाव MSP से नीचे चला जाता है, तो सरकार उस फसल को MSP या उसके आसपास के मूल्य पर खरीद सकती है

सरल शब्दों में:

MSP किसानों के लिए एक सुरक्षा मूल्य (Price Safety Net) है, न कि सभी फसलों की गारंटीशुदा खरीद।

MSP का फुल फॉर्म क्या है?

MSP का Full Form:👉 Minimum Support Price

हिंदी में MSP को:

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य

  • मिनिमम सपोर्ट प्राइस

कहा जाता है। तीनों का अर्थ एक ही है।


MSP योजना की शुरुआत कब हुई?

  • MSP नीति को 1960 के दशक में खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपनाया गया

  • 1966–67 में पहली बार गेहूं के लिए MSP घोषित किया गया

  • इसके बाद समय-समय पर अलग-अलग फसलों के लिए MSP घोषित किया जाने लगा

इस नीति का मुख्य उद्देश्य था:

  • किसानों को मूल्य स्थिरता देना

  • देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना


MSP कैसे तय किया जाता है?

MSP तय करना एक वैज्ञानिक, आर्थिक और नीतिगत प्रक्रिया है।सरकार किसी भी फसल का MSP तय करने से पहले कई अहम कारकों पर विचार करती है।

MSP निर्धारण में शामिल प्रमुख कारक:

1️⃣ फसल की उत्पादन लागत

इसमें शामिल होते हैं:

  • बीज

  • खाद और कीटनाशक

  • सिंचाई खर्च

  • मजदूरी

  • डीज़ल, बिजली

  • ऋण पर ब्याज

2️⃣ बाजार में प्रचलित कीमतें

यदि बाजार में किसी फसल की कीमत MSP से अधिक चल रही हो, तो सरकारी खरीद सीमित रहती है।

3️⃣ फसल का राष्ट्रीय महत्व

गेहूं और धान जैसी फसलें खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं, इसलिए इनके MSP पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

4️⃣ मांग-आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कीमतें

विशेष रूप से तिलहन और दलहन फसलों में वैश्विक बाजार के दाम MSP को प्रभावित करते हैं।


MSP कौन तय करता है?

भारत में MSP तय करने की प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

  • कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP)

  • 👉 यह एक स्वतंत्र सलाहकार संस्था है

  • CACP लागत और बाजार अध्ययन के बाद सरकार को सिफारिश देता है

  • केंद्र सरकार अंतिम रूप से MSP घोषित करती है

MSP के फायदे (Benefits of MSP)

✔️ किसानों को न्यूनतम मूल्य सुरक्षा

MSP किसानों को फसल का न्यूनतम मूल्य सुनिश्चित करने में मदद करता है।

✔️ खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा

MSP से किसान उत्पादन जारी रखने के लिए प्रेरित होते हैं।

✔️ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा

किसानों की आय बढ़ने से गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।

MSP की सीमाएं और आलोचनाएं

  • सभी किसानों तक MSP खरीद का लाभ नहीं पहुंच पाता

  • सरकारी खरीद कुछ फसलों और क्षेत्रों तक सीमित रहती है

  • भंडारण और वित्तीय बोझ बढ़ता है

  • बाजार तंत्र पर असर पड़ने की आशंका

👉 इसलिए MSP को सुरक्षा नीति माना जाता है, न कि पूर्ण समाधान।


किन फसलों के लिए MSP घोषित किया जाता है?

भारत सरकार हर वर्ष रबी, खरीफ और कुछ वाणिज्यिक फसलों के लिए MSP घोषित करती है।

🌾 रबी फसलें (उदाहरण):

  • गेहूं

  • चना

  • मसूर

  • सरसों

  • जौ

🌧️ खरीफ फसलें (उदाहरण):

  • धान

  • मक्का

  • ज्वार

  • बाजरा

  • मूंग, उड़द

  • मूंगफली, सोयाबीन

📌 फसलों की सूची हर वर्ष बदल सकती है।


MSP और मंडी भाव में क्या अंतर है?

बिंदु

MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य)

मंडी भाव (Market Price)

परिभाषा

सरकार द्वारा तय किया गया न्यूनतम संदर्भ मूल्य

मंडी में मांग–आपूर्ति से तय वास्तविक कीमत

कौन तय करता है

केंद्र सरकार (CACP की सिफारिश पर)

व्यापारी, खरीदार और बाजार

लागू होने का क्षेत्र

अधिसूचित फसलें (चुनिंदा)

सभी फसलें

कीमत की गारंटी

न्यूनतम मूल्य का संकेत, कानूनी गारंटी नहीं

कोई गारंटी नहीं

खरीद की व्यवस्था

कुछ फसलों में सरकारी खरीद संभव

खुला बाजार, निजी खरीद

बदलाव की आवृत्ति

साल में 1 बार (सीजन के अनुसार)

रोज़ / कभी-कभी दिन में कई बार

किस पर निर्भर

उत्पादन लागत, राष्ट्रीय महत्व, बाजार संकेत

मांग, आवक, गुणवत्ता, मौसम

किसानों के लिए उपयोग

मूल्य सुरक्षा (fallback)

वास्तविक बिक्री मूल्य

कब ज़्यादा होता है

बाजार कमजोर होने पर

मांग ज़्यादा होने पर

उदाहरण

गेहूं/धान का घोषित MSP

Lucknow, Kanpur मंडी रेट

🧠 सरल शब्दों में समझें

MSP = सुरक्षा जाल
मंडी भाव = असली कमाई

अगर मंडी भाव MSP से ऊपर है → किसान को ज़्यादा लाभ

अगर मंडी भाव MSP से नीचे है → MSP सुरक्षा देता है (जहां खरीद हो)

👉 यही कारण है कि कई बार मंडी भाव MSP से ऊपर या नीचे हो सकता है।



🔗 यह भी देखें:


❓ MSP से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

MSP क्या कानूनी गारंटी है?

नहीं, MSP एक सरकारी नीति है, इसे अभी कानूनी अधिकार का दर्जा प्राप्त नहीं है।

MSP किसानों की कैसे मदद करता है?

यह किसानों को गिरते बाजार भाव से बचाता है और न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित करता है।

क्या MSP भविष्य में जारी रहेगा?

हाँ, MSP भारत सरकार की एक स्थापित नीति है, हालांकि इसमें समय-समय पर सुधार होते रहते हैं।


🔗 उपयोगी लिंक


📌 Source (Reference):

  • कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP)

  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार

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