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Ganne Ki Kheti:गन्ने की खेती कैसे करें?

हमारे देश में गन्ना प्रमुख रूप से नकदी फसल के रूप में उगाया जाता है, जिसकी खेती प्रति वर्ष लगभग 30 लाख हेक्टर भूमि में की जाती है, इस देश में औसत उपज 65.4 टन प्रति हेक्टर है, जो की काफी कम है,


Ganne Ki Kheti:उत्तर प्रदेश में गन्ने की वैज्ञानिक खेती

गन्ना एक महत्वपूर्ण फसल है जिसका उपयोग चीनी, गुड़, और अन्य उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जाता है। इस लेख में, हम गन्ने की खेती (Ganne Ki Kheti) के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं, जिसमें बुवाई, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई, और कटाई शामिल हैं।

गन्ने की उन्नतशील प्रजातियाँ कौन-कौन सी उगाई जाती हैं ?


Ganne Ki Kheti:उत्तर प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रो के लिए गन्ने की विभिन्न प्रजातियाँ स्वीकृत हैं,




शीघ्र पकने वाली पौधों की कई प्रजातियाँ हैं, जैसे कोयम्बटूर शाहजहांपुर 8436, 88230, 95255, 96268, 98231, 95436, और कोयम्बटूर सेलेक्शन-00235 और 01235 आदि। मध्य और देर से पकने वाली प्रजातियों में कोयम्बटूर शाहजहांपुर 8432, 94257, 84212, 97264, 95422, 96275, 97261, 96269, 99259 और यू. पी.-0097 (ह्रदय) शामिल हैं। यू. पी.-22 कोयम्बटूर पन्त 84212 और कोयम्बटूर सेलेक्शन 95422 और 96436 भी हैं, इसी तरह से देर से बोई जाने वाली प्रजातियों में कोयम्बटूर शाहजहांपुर 88230, 95255, यू. पी.-39 और कोयम्बटूर सेलेक्शन 92423 शामिल हैं। सीमित सिंचाई क्षेत्र के लिए कोयम्बटूर शाहजहांपुर 28216, 96275, कोयम्बटूर सेलेक्शन 92423, और यू. पी.-39 भी हैं। क्षारीय भूमि में पैदा करने हेतु कोयम्बटूर सेलेक्शन 92263 है। जल प्लावन क्षेत्र के लिए यू. पी. 9530 और कोयम्बटूर सेलेक्शन 96236 शामिल हैं। सीमित कृषि साधन क्षेत्र हेतु कोयम्बटूर सेलेक्शन 88216, 94275, 95255 आदि हैं। लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि कोयम्बटूर सेलेक्शन-767 एक ऐसी प्रजाति है जो लगभग सभी परिस्थितियों में उगाई जा सकती है।



गन्ने की खेती के लिए अनुकूल जलवायु और भूमि किस प्रकार की होनी चाहिए?


गन्ने की बुवाई के समय 30-35 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान होना चाहिए, साथ ही वातावरण शुष्क होने पर बुवाई करनी चाहिए, गन्ना की खेती सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है, लेकिन दोमट भूमि सर्वोतम मानी जाती है, गन्ने के खेत में जल निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए, यहाँ तक की गन्ने की खेती अच्छे जल निकास वाली चिकनी भूमि में भी की जा सकती हैI


फसल के लिए खेत की तैयारी किस प्रकार करें हमारे किसान भाई?


खेत को 2-3 जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करके भुरभुरा बना लेना चाहिए आखिरी जुताई में 200-250 कुंतल सड़ी गोबर की खाद खेत में मिलकर तैयार करना चाहिएI


गन्ने की खेती के लिए गन्ने के बीज का चुनाव और मात्रा तथा गन्ने का शोधन हमे कैसे करना चाहिए?


शुद्ध रोग रहित व कीट मुक्त गन्ना अच्छे खेत से स्वस्थ बीज का चुनाव करें, गन्ने के 1/3 उपरी भाग का जमाव अच्छा होता है, गन्ने की मोटाई के अनुसार बीज की मात्रा कम ज्यादा होती है, 50-60 कुंतल लगभग 37500, तीन आंख वाले टुकड़े पैंडे, जिसे कहते हैं प्रति हेक्टर लगते हैं, अधिक देर से बुवाई करने पर डेढ़ गुना बीज की आवश्यकता पड़ती है, दो आँख वाले पैंडे 56000 प्रति हेक्टर लगते हैं, पारायुक्त रसायन जैसे ऐरीटान 6% या ऐगलाल 3% कॉपर सल्फेट कहतें हैं, कि क्रमशः 250 ग्राम या 560 ग्राम अथवा बाविस्टीन कि 112 ग्राम मात्र प्रति हैक्टर कि दर से 112 लीटर पानी में घोल बनाकर गन्ने के टुकड़ों या पैंडे को उपचारित करना चाहिए I


गन्ने की बुवाई के लिए कौन सी विधि का प्रयोग करें?


गन्ने की बुवाई हल के पीछे लाइनों में करनी चाहिए, लाइन से लाइन की दूरी बुवाई में मौसम एवं समय के आधार पर अलग-अलग रखी जाती है, शरद एवं बसंत की बुवाई में 90 सेंटीमीटर तथा देर से बुवाई करने पर 60 सेंटीमीटर लाइन से लाइन की दूरी रखी जाती है, तथा पैंडे से पैंडे की दूरी 20 सेंटीमीटर दो आंख वाले गन्ने की रखी जाती है


गन्ने की फसल की सिंचाई कब और किस समय करनी चाहिए, और कितनी मात्रा में करनी चाहिए?


सिंचाई, बुवाई एवं क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग समय एवं तरीके से की जाती है, प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में 4-5, मध्य क्षेत्र में 5-6, तथा पश्चिमी क्षेत्र में 7-8, सिंचाइयों की आवश्यकता पड़ती है, इसके साथ ही दो सिंचाई वर्षा के बाद करना लाभप्रद पाया गया है

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गन्ने की फसल में खाद एवं उर्वरक कितनी,कब, और कैसे प्रयोग में लायी जा सकती है?


गन्ने की खेती में उपज बढ़ाने के लिए:

गन्ने की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए किसान गोबर की खाद का प्रयोग करते हैं, जिसके साथ-साथ प्रति हेक्टर 150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस, और 40 किलोग्राम पोटाश तत्व का प्रयोग भी करते हैं। साथ ही, 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टर प्रयोग करना चाहिए। नाइट्रोजन का 1/3 भाग बुवाई के पूर्व कुंडों में डाला जाता है, जबकि फास्फोरस और पोटाश का पूरा हिस्सा बुवाई के पूर्व खेत में मिश्रित किया जाता है। जिंक सल्फेट की पूरी मात्रा खेत तैयार करते समय या पहली सिंचाई के बाद जब पौधों के पास आती है, तो उसके पास डालकर गुड़ाई करनी चाहिए। शेष नाइट्रोजन की मात्रा अप्रैल-मई महीने में दो बार में समान हिस्सों में बाँट कर प्रयोग करना चाहिए।


गन्ने की फसल में निराई, गुड़ाई और खरपतवार का नियंत्रण:

गन्ने के पौधों की जड़ों को नमी और वायुप्रदूषण सुनिश्चित करने, साथ ही खरपतवार का नियंत्रण करने हेतु ग्रीष्म काल में प्रत्येक सिंचाई के बाद गुड़ाई करना फायदेमंद है। इसके लिए गुड़ाई को फावड़ा, कस्सी या कल्टीवेटर से करना उपयुक्त है। साथ ही, खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के तुरंत बाद या एक या दो दिन बाद पैंडेमेथीलीन 30 ईसी की 3.3 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टर की दर से 700-800 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए। इससे खरपतवार गन्ने के खेत में उगने से रोका जा सकता है।


गन्ने की फसल को गिरने से बचाने हेतु मिटटी कब और कैसे चढाई जाती है?


गन्ने के पौधों या थान की जगह जड़ पर जून माह के अंत में हल्की मिटटी चढ़ानी चाहिए, इसके बाद जब फसल थोड़ी और बढवार कर चुके तब जुलाई के अंत में दुबारा पर्याप्त मिटटी और चढ़ा देना चाहिए, जिससे की वर्षा होने पर फसल गिर ना सके I


गन्ने की फसल में कौन कौन से रोग लगने की संभावना होती है, और उनकी रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए क्या उपाय करे?

गन्ने की खेती में रोगों का नियंत्रण:

गन्ने की खेती को वनस्पतिक सवर्धन या प्रोपोगेटेड मेथड से किया जाता है, जिसमें अधिकांश रोग बीजों के माध्यम से फैल सकते हैं। इसमें कुछ प्रमुख रोगों में काना रोग, कन्डुआ रोग, उकठा रोग, अगोले का सड़न रोग, पर्णदाह रोग, पत्ती की लाल धरी, वर्णन रोग इत्यादि शामिल हैं। इनके नियंत्रण के लिए निम्नलिखित उपायों का पालन करना चाहिए:

  1. सबसे पहले रोग-रोधी प्रजातियों की बुआई करें।

  2. बीज गन्ने का चयन स्वस्थ और रोग-मुक्त प्लांट्स से करें।

  3. रोगी पौधों या गन्ने को पूरी तरह से उखाड़कर अलग करें ताकि संक्रमण फिर से न हो सके।

  4. पेंडी रखकर फसल उत्पादन नहीं करना चाहिए।

  5. फसल चक्र अपनाकर रोगग्रस्त खेत को कम से कम साल तक गन्ना नहीं बोना चाहिए।

  6. जल निकास की सही व्यवस्था करें ताकि वर्षा का पानी खेत में जमा न रहे, क्योंकि इससे रोग फैल सकते हैं।

  7. रोग से प्रभावित खेत में कटाई के बाद पत्तियों और ठूंठों को जलाकर नष्ट करें।

  8. गन्ने की कटाई और सफाई के बाद गहरी जुताई करें।

  9. गन्ने के बीजों को गर्म पानी में शोधित करके बोना जाए।

  10. गन्ने के बीजों को रसायनों से उपचारित करके बोना जाए।


गन्ने की फसल में कौन-कौन से कीट नुकसान पहुंचातें हैं, और उनका नियंत्रण हमारे किसान भाई किस प्रकार करें?


गन्ने की फसल में कीट बुवाई से कटाई तक फसल को किसी भी अवस्था में नुकसान पहुंचाते हैं, जैसे की दीमक पेड़ो के कटे सिरों में, आँखों, किल्लों की जड़ से तथा गन्ने के भी जड़ से काट देता है तथा कटे स्थान पर भर देता है, इसके अलावा और भी कीट लागतें हैं जो कि निम्न हैं, जैसे अंकुर बेधक, चोटी बेधक, तना बेधक, गुरदासपुर बेधक, कला चिकटा, पैरिल्ला, शल कीट, ग्रास हापर, आदि हैं इन कीटो की रोकथाम के लिए गन्ने के बीज के टुकड़ों को शोधित करके बुवाई करनी चाहिए, सिंचाई कि समुचित व्यवस्था करनी चाहिए जिससे दीमक आदि कम लगते रहें, मार्च से मई तक अंडा समूह को एकत्रित कर नष्ट कर देना चाहिए, सूखी पत्तियों को गन्ने से निकाल कर जल देना चाहिए, मध्य अगस्त से मध्य सितम्बर तक 15 दिन के अंतराल पर मोनोक्रोटोफास 2.1 लीटर प्रति हैक्टर की दर से 1250 ली० पानी में घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए, इसके अलावा क्लोरोफास 20 ईसी 1 लीटर अथवा रोगोर 30% 0.825 लीटर प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करना चाहिए, कटाई के बाद सूखी पत्तियों को बिछाकर जला देना चाहिए, जिससे कीटों के अंडे नष्ट हो जाएँI


गन्ने की फसल की कटाई कब और कैसे करतें हैं?


फसल की आयु ,परिपक्वता, प्रजाति तथा बुवाई के समय के आधार पर नवम्बर से अप्रैल तक कटाई की जाती है, कटाई के पश्चात गन्ना को सीधे शुगर फेक्ट्री में भेज देना चाहिए, काफी समय रखने पर गन्ने का वजन घटने लगता है, तथा शुगर या सकर प्रतिशत कम हो जाता है यदि शुगर फेक्ट्री नहीं भेज जा सके तो उतने ही गन्ने की कटाई करनी चाहिए जिसका गुड़ बनाया जा सके ज्यादा कटाई पर नुकसान होता हैI


गन्ने की फसल से हमें कितनी उपज प्राप्त हो जाती है?


गन्ने की उपज प्रजातियों के आधार पर अलग अलग पायी जाती है, शीघ्र पकने वाली प्रजातियाँ 80-90 टन प्रति हेक्टर उपज प्राप्त होती है, मध्य एवं देर से पकने वालीं प्रजातियाँ में 90-100 टन प्रति हेक्टर उपज प्राप्त होती है, जल प्लावित क्षेत्रों में पकने वाली प्रजातियाँ 80-90 टन प्रति हेक्टर उपज देती हैं I



प्रश्न और उत्तर:

1. गन्ने की खेती के लिए सबसे अच्छी मिट्टी कौन सी है?

गन्ने की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी वह है जो सुखा-सहनशील हो और मिट्टी का pH 6.0-7.0 होना चाहिए।

2. गन्ने की बुवाई का सही समय क्या है?

गन्ने की बुवाई का सही समय क्षेत्र के मौसम पर निर्भर करता है, आमतौर पर गन्ने की बुवाई मानसून के बाद की जाती है।

3. गन्ने की सिंचाई की आवश्यकता कितनी होती है?

गन्ने की फसल को अच्छी तरह से सिंचित करने की आवश्यकता है, खासकर गर्मियों के महीनों में। आमतौर पर, गन्ने की फसल को हर 10-15 दिनों में सिंचित किया जाता है।

4. गन्ने की फसल को उर्वरक देने की आवश्यकता क्यों है?

गन्ने की फसल को अच्छी तरह से बढ़ने के लिए उर्वरक की आवश्यकता होती है। आमतौर पर, गन्ने की फसल को नाइट्रोजन, फास्फोरस, और पोटेशियम उर्वरकों की आवश्यकता होती है।

5. गन्ने की फसल को कब काटा जाता है?

गन्ने की फसल को आमतौर पर 12-18 महीने में काटा जाता है। जब गन्ने के डंठल पूरी तरह से परिपक्व हो जाते हैं और उनका रंग नारंगी-पीला हो जाता है, तो उन्हें काटने के लिए तैयार माना जाता है।


निष्कर्ष:

गन्ना एक महत्वपूर्ण फसल है जिसका उपयोग चीनी, गुड़, और अन्य उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जाता है। गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी, बुवाई का सही समय, सिंचाई, और उर्वरक प्रबंधन महत्वपूर्ण है। गन्ने की फसल को अच्छी तरह से प्रबंधित करने से किसान अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं।



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