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PM Kisan FPO Yojana: जानिए- क्या है FPO और इस योजना से कैसे मिलेगा लाभ

भारत सरकार ने किसानों को और उनकी फसलों को समृद्धि प्रदान करने के लिए PM Kisan FPO Yojana की शुरुआत की है। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम जानेंगे कि FPO (फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी) क्या होती है और PM Kisan FPO Yojana से किसानों को कैसे हो सकता है लाभ।

FPO का मतलब है Farmer Producer Organization. यह एक ऐसा संगठन है जो किसानों को एक साथ लाता है और उन्हें अपनी उपज को बेहतर कीमत पर बेचने में मदद करता है. FPO को सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दी जाती है, ताकि वे अपने सदस्यों को बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकें.

PM Kisan FPO Yojana Kya hai?

PM Kisan FPO Yojana kya hai? किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organization) किसानों का एक समूह होगा, जो कृषि उत्पादन कार्य में लगा हो और कृषि से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियां चलाएगा।एक कंपनी की तरह

किसानो की आय दोगुनी करने हेतु अगले पांच साल के लिए 5000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है मोदी सरकार । किसानों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें समृद्ध बनाने का प्लान केंद्र सरकार कर रही है। इसके लिए उन्हें एक कंपनी बनानी यानी किसान उत्‍पादक संगठन (FPO-Farmer Producer Organisation) बनाना होगा। सरकार ने 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन बनाने की मंजूरी दे दी है।

पीएम किसान FPO योजना की पात्रता

  1. आवेदक पेशे से किसान होना चाहिए।

  2. आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए।

  3. प्लेन क्षेत्र में एक एफपीओ में कम से कम 300 सदस्य होने चाहिए।

  4. पहाड़ी क्षेत्र में एक एसपीओ में कम से कम 100 सदस्य होने चाहिए।

  5. एफपीओ के पास स्वयं की कृषि योग्य भूमि होनी अनिवार्य है एवं उसे समूह का हिस्सा होना भी अनिवार्य है।

इसका रजिस्ट्रेशन कंपनी एक्ट में ही होगा, इसलिए इसमें वही सारे फायदे मिलेंगे जो एक कंपनी को मिलते हैं। यह संगठन कॉपरेटिव पॉलिटिक्स से बिल्कुल अलग होंगे यानी इन कंपनियों पर कॉपरेटिव एक्ट नहीं लागू होगा।



एफपीओ लघु व सीमांत किसानों का एक समूह होगा, जिससे उससे जुड़े किसानों को न सिर्फ अपनी उपज का बाजार मिलेगा बल्कि खाद, बीज, दवाइयों और कृषि उपकरण आदि खरीदना आसान होगा। सेवाएं सस्ती मिलेंगी और बिचौलियों के मकड़जाल से मुक्ति मिलेगी।

एफपीओ बनाकर पैसा लेने की शर्तें


(1) अगर संगठन मैदानी क्षेत्र में काम कर रहा है तो कम से कम 300 किसान उससे जुड़े होने चाहिए। यानी एक बोर्ड मेंबर पर कम से कम 30 लोग सामान्य सदस्य हों। पहले 1000 था।

(2) पहाड़ी क्षेत्र में एक कंपनी के साथ 100 किसानों का जुड़ना जरूरी है। उन्हें कंपनी का फायदा मिल रहा हो।

(3) नाबार्ड कंस्ल्टेंसी सर्विसेज आपकी कंपनी का काम देखकर रेटिंग करेगी, उसके आधार पर ही ग्रांट मिलेगी।


(4) बिजनेस प्लान देखा जाएगा कि कंपनी किस किसानों को फायदा दे पा रही है। वो किसानों के उत्पाद का मार्केट उपलब्ध करवा पा रही है या नहीं।

(5) कंपनी का गवर्नेंस कैसा है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर कागजी हैं या वो काम कर रहे हैं। वो किसानों की बाजार में पहुंच आसान बनाने के लिए काम कर रहा है या नहीं।

(6) अगर कोई कंपनी अपने से जुड़े किसानों की जरूरत की चीजें जैसे बीज, खाद और दवाईयों आदि की कलेक्टिव खरीद कर रही है तो उसकी रेटिंग अच्छी हो सकती है। क्योंकि ऐसा करने पर किसान को सस्ता सामान मिलेगा।



एफपीओ से छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को मदद मिलेगी। एफपीओ के सदस्य संगठन के तहत अपनी गतिविधियों का प्रबंधन कर सकेंगे, ताकि प्रौद्योगिकी, निवेश, वित्त और बाजार तक बेहतर पहुंच हो सके और उनकी आजीविका तेजी से बढ़ सके। छोटे और सीमांत किसानों की संख्या देश में लगभग 86 फीसद हैं, जिनके पास औसतन 1.1 हेक्टेयर से कम जोत है। इन छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को खेती के समय भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें प्रौद्योगिकी, उच्चगुणवत्ता के बीज, उर्वरक, कीटनाशक और समुचित वित्त की समस्याएं शामिल हैं।


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