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Mungfali Ki Kheti:मूंगफली की खेती कब और कैसे करें

मूंगफली भारत की महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। मूंगफली की खेती तिलहनी फसलों में से एक महत्वपूर्ण फसल है| जो की भारत के विभिन्न राज्यों में उगाई जाने वाली मुख्य फसल है| मूंगफली मनुष्य के आहार का एक प्रमुख भाग है, भारत में मूंगफली के उत्पादन का लगभग 75 से 85 प्रतिशत हिस्सा तेल के रूप में प्रयोग मे लाया जाता है|

मूंगफली की फसल गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों में सबसे अधिक उगाई जाती है |

Mungfali ki Kheti ki kaise kare -Puri Jankari Hindi me


मूंगफली (Peanuts)

1 उपयुक्त जलवायु

2 खेत की तैयारी

3 उन्नत किस्में

4 बुआई का समय

5 मूंगफली की बुवाई

6 खरपतवार नियंत्रण

7 जल प्रबंधन

8 मूंगफली लगने वाले रोग

9 फसल कटाई

10 पैदावार



1 उपयुक्त जलवायु


सूर्य की अधिक रोशनी और उच्च तापमान इसकी बढ़वार के लिए अनुकूल हैं| फसल की अच्छी पैदावार के लिए लगभग 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होना आवश्यक है इसकी खेती वर्ष भर की जा सकती है मूंगफली लगभग 600 से 1500 मिलीमीटर वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाई जाती हैं तथा 6.5 से 7.0 पीएचमान (pH) वाली गहरी अच्छी निकास वाली भूमि होनी चाहिए



2 खेत की तैयारी


खेत की पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से कर लेनी चाहिए उसके के बाद 3 से 4 जुताइयां कल्टीवेटर या देशी हल से करके मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए| खेत में नमी को बनाए रखने के लिए जुताई के बाद पाटा लगाना जरूरी है| जिससे नमी काफी समय तक बनी रहे । खेत की आखिरी तैयारी करने के समय 2.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से जिप्सम का उपयोग करें.


3 उन्नत किस्में


मूंगफली के कुछ उन्नत किस्मे बता रहे है जो निम्न प्रकार है


किस्म पकने का समय(लगभग दिन मे )

  • आर जी 425 120-130

  • एम ए 10 125-130

  • एम 548 120-126

  • टी जी 37 ए 120-130

  • जी 201 110-120


अन्य किस्म-

ए के 12 – 24, जी जी 20, सी 501, जी जी 7, आर जी 425 आर जे 382, नंबर 13, एम 13, एम 522, एम 197, अम्बर, प्रकाश, टी जी – 26, एस जी 84


4 बुआई का समय


१ रबी या जायद- रबी या जायद मौसम की मूंगफली की बुवाई के लिए उचित तापमान उपलब्ध होता है यह अवस्था फरवरी से मार्च में आती है|

२ खरीफ-फसल की बुवाई का उचित समय जून का दूसरा पखवाड़ा है|


5 मूंगफली की बुवाई


मूंगफली की खेती मानसून शुरू होने के साथ की जाती है। सामान्य रूप से 15 जून से 15 जुलाई के मध्य होती है। बीज बोने से पहले 3 ग्राम थायरम या 2 ग्राम मैंकोजेब दवा प्रति किलो बीज के हिसाब से लेना चाहिए। इस दवाई से बीज में लगने वाले रोगों से बचाया जा सकता है और इससे अंकुरण भी अच्छा होता है।


6 खरपतवार नियंत्रण


मूँगफली की फसल मे खरपतवार नियंत्रण करना सबसे आवश्यक है। खेत में खरपतवार की अधिकता के कारण फसल की उपज पर प्रभाव पड़ता है। मूंगफली की बुवाई के बाद लगभग 3 से 6 सप्ताह के बीच खेत में विभिन्न किस्मों के घास के निकलने की संभावना अधिक होती है। कुछ उपायों एवं दवाओं के प्रयोग से आप आसानी से इस पर नियंत्रण कर सकते हैं खरपतवार प्रबंधन न किया जाए तो 30 से 50 प्रतिशत तक फसल का नुकसान हो सकता है।

  1. बुवाई के 15 दिनों बाद पहली निराई-गुड़ाई करें।

  2. दूसरी निराई-गुड़ाई बुवाई के 35 दिनों बाद करें।

  3. खड़ी फसल में 150- 200 लीटर पानी में 250 मिलीलीटर की दर से इमेजाथापर 10 % SL मिला कर छिड़कना चाहिए

  4. 3 दिनों के अंदर प्रति एकड़ खेत में 700 ग्राम पेंडीमिथेलीन 38.7 प्रतिशत का प्रयोग करें।

7 जल प्रबंधन


मूंगफली खरीफ फसल होने के कारण इसमें सिंचाई की प्रायः आवश्यकता कम पड़ती। सिंचाई देना सामान्य रूप से वर्षा पर निर्भर करता है फिर भी किसी भी फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचाई की अवश्यकता होती है मूंगफली की फलियों का विकास जमीन के अन्दर होता है। इसे कारण से खेत में बहुत समय तक पानी भरे रहने से फलियों के विकास और दोनों उपज पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। अतः बुवाई के समय यदि खेत समतल न हो तो बीच-बीच में कुछ मीटर की दूरी पर हल्की नालियां बना देना चाहिए। जिससे वर्षा का पानी खेत के बीच में न रुके और अतिरिक्त जल वर्षा होते ही बाहर निकल जाए।


8 मूंगफली लगने वाले रोग

  1. टिक्का रोग:मूँगफली में लगने वाला यह प्रमुख रोग है इस रोग के दौरान पत्तियों के ऊपर बहुत अधिक धब्बे बन जाते हैं। जिससे पत्तियाँ पकने से पहले ही गिर जाती हैं इस रोग से बचाव के लिए पुराने संक्रमित अवशेषों को मिट्टी में दबा दें। उर्वरक एनपीके और जिप्सम का प्रयोग करें,अगर इस रोग के प्रभाव में कमी न आए तो कार्बेन्डाजिम रसायन की 200 ग्राम मात्रा को प्रति 100 लीटर पानी में मिलाकर 15-15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें।

  2. गेरुई रोग:गेरुई रोग के कारण पैदावार में लगभग 14-30 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है। इस रोग के लक्षण सबसे पहले पत्तियों की निचली सतह पर धब्बों के रूप में मालूम पड़ते हैं। इस रोग के कारण बीजों में तेल की मात्रा घट जाती है।

  3. ग्रीवा विगलन

  4. तना विगलन

  5. एफ्ला जड़/पीला कवक

  6. अगेती टिक्का रोग

  7. सूखा जड़ विगलनपछेती टिक्का रोग


9 फसल कटाई


मूंगफली की परिपक्वता के प्रमुख लक्षण हैं पत्तियों का पकना और पुरानी पत्तियों का गिरना ,पत्ते का पीला पड़ना, जब फली सख्त हो जाती है और कोशिकाओं के अंदरूनी तरफ गहरा रंग होता है। अगर परिपक्वता से पहले कटाई कराते हैं तो कटाई करने से बीजों के सिकुड़ने के कारण उपज कम हो जाती है जब वे सूख जाते हैं। कटाई में देरी करने से बीजों को गुच्छों की किस्म में सुप्त होने के कारण दायर में ही अंकुरित किया जाता है।


10 पैदावार


उन्नत विधियों के उपयोग करने पर मूंगफली की सिंचित क्षेत्रों में औसत उपज लगभग 20-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त की जा सकती है। इसकी खेती में लगभग 25-30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का खर्च आता हैं। मूंगफली का भाव अगर 30 रुपये प्रति किलो होने पर 35 से 40 हजार रुपये प्रति हेक्टर का शुद्ध लाभ मिल सकता है।


Q1.मूँगफली में कौन कौन से पोषक तत्व पाये जाते है?

Ans कैलोरी: 567,पानी: 7%,प्रोटीन: 25.8,ग्राम कार्ब्स: 16.1, ग्राम शुगर: 8.5आदि पोषक तत्व पाये जाते है


Q2. मूंगफली का सबसे ज्यादा उत्पादन किस राज्य मे होता है?

Ans मूंगफली का सबसे ज्यादा उत्पादन गुजरात में होता है.जो की देश के कुल मूंगफली उत्पादन का लगभग 50 % है


Q3.मूंगफली के लिए उपयुक्त मिट्टी कौन सी है?

Ans दोमट व बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम रहती है।


Q4.मूंगफली के दाने में क्या पाया जाता है?\

Ans मूँगफली में आयरन, कैल्शियम,जिंक तथा विटामिन ई और विटामिन बी 6 पाया जाता है


Q5.मूंगफली कौन सी फसल है?

Ans मूँगफली एक तिलहन फसल है।


मूंगफली खाने के फायदे

१ मूंगफली जुकाम में बहुत लाभकारी है

२ मूंगफली खाने से ब्लड शुगर संतुलित रहता है

३ मूंगफली वजन कम करने में लाभदायक है

४,मूँगफली खाना त्वचा के लिए लाभदायक है

५ मूंगफली महिलाओं पेट के कैंसर को कम कर सकता है

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